आठवें वेतन आयोग को लेकर केंद्र सरकार के कर्मचारियों के बीच चर्चा तेज हो गई है। हाल ही में स्टाफ साइड की दूसरी बैठक से पहले कर्मचारी संगठनों ने अपनी प्रमुख मांगों को लेकर सक्रियता बढ़ा दी है। इस संबंध में ऑल इंडिया एनपीएस एंप्लॉईज फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मंजीत सिंह पटेल ने एनसी-जेसीएम (स्टाफ साइड) के सचिव शिव गोपाल मिश्रा से मुलाकात की। इस बैठक में कर्मचारियों के हितों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि इन मांगों को आठवें वेतन आयोग के सामने आधिकारिक रूप से रखा जाएगा ताकि भविष्य में कर्मचारियों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
400 दिन EL एनकैशमेंट की प्रमुख मांग
बैठक में सबसे प्रमुख मुद्दा अर्जित अवकाश यानी Earned Leave के एनकैशमेंट की सीमा बढ़ाने का रहा। कर्मचारी संगठनों ने मांग की है कि रिटायरमेंट के समय कर्मचारियों को मिलने वाली अर्जित अवकाश एनकैशमेंट की सीमा 400 दिनों तक की जानी चाहिए। उनका मानना है कि वर्तमान सीमा को बढ़ाने से कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के समय अधिक आर्थिक लाभ मिल सकेगा। इस प्रस्ताव पर कर्मचारियों के प्रतिनिधियों ने विस्तार से चर्चा की और इसे वेतन आयोग के समक्ष रखने की सहमति बनी।
छुट्टियों से जुड़े प्रस्ताव भी आए सामने
कर्मचारी संगठनों ने कर्मचारियों के लिए छुट्टियों से संबंधित कई प्रस्ताव भी रखे। बैठक में सुझाव दिया गया कि धार्मिक और सामाजिक परंपराओं के लिए कर्मचारियों को 28 दिन का विशेष अवकाश दिया जाए। इसके अलावा हर साल 14 दिन की कैजुअल लीव और 30 दिन की अर्जित अवकाश सुनिश्चित करने की मांग भी रखी गई। कर्मचारियों का कहना है कि इससे उन्हें व्यक्तिगत और पारिवारिक जिम्मेदारियों को पूरा करने में सुविधा होगी।
कैशलेस मेडिकल सुविधा की मांग
बैठक में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर भी कई अहम मुद्दे उठाए गए। कर्मचारी संगठनों ने प्रस्ताव रखा कि सेवानिवृत्ति के बाद कर्मचारियों को सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम यानी CGHS का विकल्प दिया जाए। इसके साथ ही इलाज के लिए कैशलेस मेडिकल सुविधा उपलब्ध कराने की भी मांग की गई। उनका कहना है कि इससे कर्मचारियों को इलाज के समय अपनी जेब से खर्च नहीं करना पड़ेगा और उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी।
शिक्षकों की रिटायरमेंट उम्र बढ़ाने का सुझाव
बैठक में शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कर्मचारियों के लिए भी एक महत्वपूर्ण मांग सामने आई। इसमें शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु को बढ़ाकर 65 वर्ष करने का सुझाव दिया गया। इसके अलावा यह भी कहा गया कि केंद्र सरकार के आदेश और सर्कुलर सीधे केंद्र शासित प्रदेशों को भेजे जाएं ताकि नीतियों के क्रियान्वयन में देरी न हो।
कर्मचारी संगठनों का मानना है कि यदि इन मांगों को आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों में शामिल किया जाता है तो इससे देशभर के लाखों कर्मचारियों और पेंशनधारकों को बड़ा लाभ मिल सकता है।
Disclaimer: यह लेख उपलब्ध जानकारी के आधार पर सामान्य सूचना देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। आठवें वेतन आयोग से संबंधित अंतिम निर्णय और सिफारिशें केंद्र सरकार द्वारा जारी आधिकारिक घोषणाओं के अनुसार ही लागू होंगी। किसी भी आधिकारिक जानकारी के लिए सरकारी अधिसूचना या विश्वसनीय स्रोत की पुष्टि करना आवश्यक है।









